“हद”

जो तौर है दुनिया का

उसी तौर से रहो

हम भी अपनी जद में है

तुम भी अपनी हद में रहो।

बहुत उड़ान भरें है बाँझ ने

उसे उसकी हद ना बताओ

तुम चंचल चिड़िया हो

बस अपनी हद में रहो।

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“दिल्ली” एक अपनापन सा एहसास

भारत हमेसा से ही विभिताओं का देश रहा है यहां तरह तरह की बोली भाषा और तरह तरह के लोग अनेको प्रकार की रीति रिवाज देखने को मिल जाएंगे यहाँ हर शहर का पानी और तौर तरीके अलग मिलेंगे कही थोड़ी सर्दी कहीं गर्मी कहो कभी बारिश हर प्रदेश हर शहर अपनी किसी ना किसी एक विशेषता से मशहूर है

इन सब से थोड़ा हट के एक शहर है दिल्ली । जिसे भारत का दिल कहा जाता है ।

दिल्ली के पास अमीरों के लिए भी दिल है और गरीबों के लिए भी प्यार है ।

पुरुषों के लिए सम्मान और महिलाओं के लिए इज्ज़त है।

यह रह कर मुझे बिल्कुल अपनापन सा प्रतीत होता है

इस शहर में बिहारी और पंजाबी और हरियाणवी का अनोखा मिश्रण है ।

यहाँ के कुछ लोग अपने छतों पर कुछ लोग कबूतर पालने शौकीन है । और रोज शाम को कबूतरों को उड़ाया जाता है ।

वाह! उस पल का नजारा देखते ही बनता है । सभी सफेद कबूतरों का झुन्ड ऐसे आसमान में गोते लगाता है मानो जैसे कोई कलाबाजी का शो चल रहा हो और हम दर्शक हैं ।

यहां बने तमाम पर्यटक स्थल में से एक अक्षरधाम मंदिर पूर्ण रूप से पत्थरों बना एक अदभुत कला का प्रदर्शन करता है। इसी प्रकार लाल किला ,लोटस टेम्पल आदि । यहाँ की सुंदरता में चार चाँद लगाते है ।

डिजिटल भारत?

बात आज एक ऐसे आयाम की जिसके बोझ तले भारत के सामान्य लोग दबे जा रहे हैं।
बात “डिजिटल कैशलेस ट्रांसपैरेंट इंडिया” की हाल ही में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने भौतिक बैंक को आने वाले कुछ वर्षों में अप्रासंगिक बताया है उनका कहना है कि भारत मे बढ़ रहे डाटा खपत व डाटा विश्लेषण वित्तीय समावेशन को मजबूती देंगे। भारत मे 1अरब से अधिक बायोमेट्रिक आधार कार्ड धारक है जिनका उपयोग बैंकिंग सेवाओं, सुविधाओ के लिए किया जा रहा है जो आने वाले दिनों में नकदीरहित अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगे।
सत्ता में आने के पहले मोदी ने अपने तमाम भाषणों में कालेधन को लेकर चिंताएं व्यक्त की थी साथ ही आष्वासन भी दिया था कि उनकी सरकार आने के बाद स्थितियां बदलेंगी? सरकार बनने के बाद उन्होंने सार्थक प्रयास भी किये SIT का गठन, नोटबंदी जैसे कठोर फैसले लिए, डिजिटल ट्रांसक्शन के लिए प्रोत्साहित किया परन्तु स्थितियों में कोई विशेष सुधार नही हुआ। इसके उलट नोटबन्दी के बाद मचे नोटों की हाहाकार को दबाने में सरकार को लगभग एक वर्ष लग गए। E-Payment को ‘बढ़ावा बिना जागरूकता व बिना सेवाओं को दुरुस्त किये’ दिया गया नतीजन सर्वर में फसे पैसे के लिए कोई संतोषजनक उपचार आज भी नही है। ये अलग विषय है की Paytm जैसे E-Wallet डिजिटल पेमेंट के माध्यम से अपनी पहचान बनाने में सफल हुए। 4G आने के बाद देश का औसत डेटा स्पीड अन्य कई देशों से अभी भी बहुत कम है, कोई भी सेवा तब तक सफल नही जब तक अंतिम उपभोक्ता पूर्ण सन्तुष्टि का अनुभव न करे।
E-Payment के लाभ भी है पैसे के भुगतान में आसानी, कैश के ले जाने ले आने का झंझट नही, बैंक जाने की जरूरत नही इसलिए समय की बचत, पारदर्शी अर्थव्यवस्था को मजबूती, भ्रष्टाचार में कमी नोटों की छपाई व परिवहन में लगने वाले पैसे की बचत E-Payment पर्यावरण के अनुकूल भी है।
परन्तु इस व्यवस्था को सिर्फ़ जनता तक सीमित रखना, सेवाएं व जागरूकता में कमी रहना इसे खोखला करने वाला साबित होगा।
बड़ा प्रश्न ये है कि क्या सभी राजनीतिक दल प्रथमतः सत्तापक्ष ऐसी पहल करेगा की उसके सारे खर्चे, पार्टी के लिए दिए गए चंदे का भुगतान E-Payment के माध्यम से हो साथ ही राजनीतिक दलों द्वारा किये गए खर्च खासतौर पर चुनावों में किये गए खर्च (जिसमे चुनाव प्रचार, पोस्टर, बैनर, सभाओं के खर्च वाहन, कार्यकर्ताओं पे होने वाले खर्चे आदि शामिल हो) Online या नागदरहित हो सकते हैं? यदि नही तो जनता को कैशलेश के नाम पर बैंक की लंबी-लंबी कतारों में खड़ा करना, घटिया उबाऊ सर्विस देना उनके साथ बेमानी होगी। आपके बैंको में कैश नही, आपके खराब नगदरहित ATM ’24×7 घंटे सेवा’ की पोल खोल रहे हैं, आपके बैंक मित्र बेचारे कमीशन के मारे किसी तरह से कैश की व्यवस्था कर कुछ लोगों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, आम जनता अपने ही पैसे के लिए भिखारियों की तरह यहाँ-वहाँ भटक रही है। क्योंकि आप और आपके साथ सभी गरबों, पिछड़ों, मजदूर, किसानों की मशीहा राजनीतिक दल 2019 का चुनाव नगदसहित लड़ने की तैयारी कर रहे हैं और सामान्य जनता लग्न के दिनों में कैश की किल्लत से दोबहियाँ कर रहा है।
खेद!
Virendra kumar

कोहरे का कोहराम व प्यार {The fog’s uproar & love}

इस भागदौड़ की दुनिया में किसी के पास समय नही है सभी लोग अपने अपने गंतव्य स्थल पर अति शीघ्र पहुँच जाना चाहते है।

जैसा कि आप लोग जानते होंगे सर्दियों का मौसम समाप्ति की ओर है और बीते दिनों में सफर के दौरान आप लोग कभी ना कभी कोहरे के चपेट से एक ना एक बार जरूर ही पीड़ित हुए होंगे कोई कम या कोई थोड़ा ज्यादा ही।

कुछ ऐसे भी लोग है जिन्हें इसी कोहरे में उन्हें बहुत आनंद आता है जैसे कि मैं दोस्तों मैं रोज देर रात को लगभग 25 किमी का सफर बड़े मजे से अपनी मोटरसाइकिल से तय करता हूं ।

इस मजेदार सफर को और मजेदार बनाने मेरा हमसफर दोस्त कोहरा मेरा साथ देता है । जिस तरह से मेरे निकलने पर वह और भी घना हो जाता है ऐसा लगता है मेरा इंतज़ार ही कर रहा हो फिर मैं अपने हेलमेट का काँच खोलकर उसके साथ हो जाता हूं।

उसके सुर्ख फौवारे मेरे चेहरे के ऊपर हल्की हल्की गुदगुदी करने लगते है ।

वो कभी घना कभी हल्का मैं कभी धीरे कभी तेज़ एक दूसरे के साथ सफर करते घर को पहुँच जाते हैं।

मेरे प्यारे दोस्त अब तुम चले जाओगे मुझे तन्हा अकेला सफर करने को छोड़ कर।

तुम्हारी याद आएगी । जल्दी लौट कर आना मुझे तुम्हारा इंतज़ार रहेगा ।

“कथनी” और “करनी” में फर्क होता है …

आज एक निवेदन के साथ कुछ लिखने की कोशिश की है मैंने … Please अपना 2 मिनट का समय निकाल कर इस पोस्ट को दें …
ये कोई कविता “शायरी या गजल तो नहीं है जिससे मैं आपका मनोरंजन कर सकूँ ..
इस के लिये माफी चाहता हूँ 👏
क्यूँकि मैं खुद को इस काबिल नहीं समझता
आज ठंड में कुहारते हुए गरीब बच्चों को देखा तो मन हुआ लिखूँ कुछ ..
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कथनी और करनी में फर्क होता है दोस्तों
गरीब और जरूरतमंदों को देख कर “अफसोस” तो हर कोई जताता है ..
‘मगर क्या मदत के लिये सब के हाथ खड़े होते हैं ??…. नहीं 😦
बोलते सब हैं लेकिन करते कुछ ही हैं …:/


सर्दी बढ़ रही है …
अगर हम सब नये कपड़े गरीबों को दान नहीं कर सकते तो #Atleast इतना तो हर कोई कर सकता है कि जो कपड़े हम #use ही नहीं करते उन्हें तो दें..
खाली पड़े रहने से तो अच्छा है ना किसी के काम आ जायें
ये इसलिये कह रहा हूँ क्योंकि ये तो हर कोई कर सकता है … ❤
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लेकिन इन सब के लिये समय निकाले कौन ?
इस बारे में सोचे कौन ?
समय नहीं मिल रहा यार ‘
अपनी ही life से परेशान हूँ किसी की क्या मदत करूँ .. और सबसे बड़ी गलत फहमी तो ये यार मुझ अकेले की मदत से क्या होगा .. :O
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अरे भाई पहले आप खुद तो मदत को आगे बढ़ो बाकी को बाद में कहना ..
यदि सब ऐसा ही सोचेंगे तो क्या कोई भी #help कर पायेगा ?
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दोस्तों
क्या आपको नहीं लगता अगर हर कोई अपने दो चार कपड़े भी किसी को दान कर देता है तो इस बार की ठंड में एक भी गरीब ठंड से नहीं मरेगा ?
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#दोस्तों mttr ये नहीं करता कि आप दुखी इंसानों को देखकर कितना दुखी होते हैं ..mttr ये करता है कि आप उनकी मदत के लिये कितना आगे बढते हैं.. ❤
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कर के देखिये सिर्फ कह कर नहीं ..
कपड़े वो पहनेंगे सुकून आपके दिल को मिलेगा जब आपको पता लगेगा कि आप के कपड़े किसी को ठंड से बचा रहे हैं .. 🙂
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मेरे इस पोस्ट से अगर एक भी इंसान मदत के लिये बढ़ पाता है तो मैं अपना post सार्थक समझूँगा 🙏
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