यूँही

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कोहरे का कोहराम व प्यार {The fog’s uproar & love}

इस भागदौड़ की दुनिया में किसी के पास समय नही है सभी लोग अपने अपने गंतव्य स्थल पर अति शीघ्र पहुँच जाना चाहते है।

जैसा कि आप लोग जानते होंगे सर्दियों का मौसम समाप्ति की ओर है और बीते दिनों में सफर के दौरान आप लोग कभी ना कभी कोहरे के चपेट से एक ना एक बार जरूर ही पीड़ित हुए होंगे कोई कम या कोई थोड़ा ज्यादा ही।

कुछ ऐसे भी लोग है जिन्हें इसी कोहरे में उन्हें बहुत आनंद आता है जैसे कि मैं दोस्तों मैं रोज देर रात को लगभग 25 किमी का सफर बड़े मजे से अपनी मोटरसाइकिल से तय करता हूं ।

इस मजेदार सफर को और मजेदार बनाने मेरा हमसफर दोस्त कोहरा मेरा साथ देता है । जिस तरह से मेरे निकलने पर वह और भी घना हो जाता है ऐसा लगता है मेरा इंतज़ार ही कर रहा हो फिर मैं अपने हेलमेट का काँच खोलकर उसके साथ हो जाता हूं।

उसके सुर्ख फौवारे मेरे चेहरे के ऊपर हल्की हल्की गुदगुदी करने लगते है ।

वो कभी घना कभी हल्का मैं कभी धीरे कभी तेज़ एक दूसरे के साथ सफर करते घर को पहुँच जाते हैं।

मेरे प्यारे दोस्त अब तुम चले जाओगे मुझे तन्हा अकेला सफर करने को छोड़ कर।

तुम्हारी याद आएगी । जल्दी लौट कर आना मुझे तुम्हारा इंतज़ार रहेगा ।

“कथनी” और “करनी” में फर्क होता है …

आज एक निवेदन के साथ कुछ लिखने की कोशिश की है मैंने … Please अपना 2 मिनट का समय निकाल कर इस पोस्ट को दें …
ये कोई कविता “शायरी या गजल तो नहीं है जिससे मैं आपका मनोरंजन कर सकूँ ..
इस के लिये माफी चाहता हूँ 👏
क्यूँकि मैं खुद को इस काबिल नहीं समझता
आज ठंड में कुहारते हुए गरीब बच्चों को देखा तो मन हुआ लिखूँ कुछ ..
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कथनी और करनी में फर्क होता है दोस्तों
गरीब और जरूरतमंदों को देख कर “अफसोस” तो हर कोई जताता है ..
‘मगर क्या मदत के लिये सब के हाथ खड़े होते हैं ??…. नहीं 😦
बोलते सब हैं लेकिन करते कुछ ही हैं …:/


सर्दी बढ़ रही है …
अगर हम सब नये कपड़े गरीबों को दान नहीं कर सकते तो #Atleast इतना तो हर कोई कर सकता है कि जो कपड़े हम #use ही नहीं करते उन्हें तो दें..
खाली पड़े रहने से तो अच्छा है ना किसी के काम आ जायें
ये इसलिये कह रहा हूँ क्योंकि ये तो हर कोई कर सकता है … ❤
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लेकिन इन सब के लिये समय निकाले कौन ?
इस बारे में सोचे कौन ?
समय नहीं मिल रहा यार ‘
अपनी ही life से परेशान हूँ किसी की क्या मदत करूँ .. और सबसे बड़ी गलत फहमी तो ये यार मुझ अकेले की मदत से क्या होगा .. :O
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अरे भाई पहले आप खुद तो मदत को आगे बढ़ो बाकी को बाद में कहना ..
यदि सब ऐसा ही सोचेंगे तो क्या कोई भी #help कर पायेगा ?
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दोस्तों
क्या आपको नहीं लगता अगर हर कोई अपने दो चार कपड़े भी किसी को दान कर देता है तो इस बार की ठंड में एक भी गरीब ठंड से नहीं मरेगा ?
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#दोस्तों mttr ये नहीं करता कि आप दुखी इंसानों को देखकर कितना दुखी होते हैं ..mttr ये करता है कि आप उनकी मदत के लिये कितना आगे बढते हैं.. ❤
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कर के देखिये सिर्फ कह कर नहीं ..
कपड़े वो पहनेंगे सुकून आपके दिल को मिलेगा जब आपको पता लगेगा कि आप के कपड़े किसी को ठंड से बचा रहे हैं .. 🙂
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मेरे इस पोस्ट से अगर एक भी इंसान मदत के लिये बढ़ पाता है तो मैं अपना post सार्थक समझूँगा 🙏
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